Friday, 2 August 2019

मैं न होता तो क्या होता


अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा, तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण उन्हों ने देखा मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया, यह देखकर वे गदगद हो गये। वे सोचने लगे। यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता तो सीता जी को कौन बचाता???

बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है,  मै न होता तो क्या होता ? परन्तु ये क्या हुआ सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया। तब हनुमान जी समझ गये कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं।

आगे चलकर जब त्रिजटा ने कहा कि लंका में बंदर आया हुआ है और वह लंका जलायेगा तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नही है और त्रिजटा कह रही है की उन्होंने स्वप्न में देखा है, एक वानर ने लंका जलाई है। अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा।

जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब विभीषण ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है।

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नही जायेगा पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर घी डालकर आग लगाई जाये तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मै कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता और कहां आग ढूंढता, पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया, जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं तो मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !

इसलिये हमेशा याद रखें कि संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं, इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि...
 मै न होता तो क्या होता

Thursday, 27 June 2019

योग और योगासन

योग क्या है:- 

योग हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर काम करता है। योग का अर्थ एकता या बांधना है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द युज, जिसका मतलब है जुड़ना। आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना। व्यावहारिक स्तर पर, योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। 
    योग आसन,  प्राणायाम, मुद्रा, बँध, षट्कर्म और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होती है। योग जीने का एक तरीका भी है और अपने आप में परम उद्देश्य भी।

योग के लाभ:-

शारीरिक और मानसिक उपचार योग के सबसे अधिक ज्ञात लाभों में से एक है।
योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और अन्य बीमारियों में चिकित्सा के एक सफल विकल्प है। 
       चिकित्सा वैज्ञानिकों के अनुसार, योग चिकित्सा तंत्रिका और अंतःस्रावी तंत्र में बनाए गए संतुलन के कारण सफल होती है जो शरीर के अन्य सभी प्रणालियों और अंगों को सीधे प्रभावित करती है। 
अधिकांश लोगों के लिए, हालांकि, योग केवल तनावपूर्ण समाज में स्वास्थ्य बनाए रखने का मुख्य साधन हैं। इनके अलावा योग के कई आध्यात्मिक लाभ भी हैं। इनका विवरण करना आसान नहीं है, क्योंकि यह आपको स्वयं योग अभ्यास करके हासिल और फिर महसूस करने पड़ेंगे।

योग के नियम:-

अगर आप यह कुछ सरल नियमों का पालन करेंगे, तो अवश्य योग अभ्यास का पूरा लाभ पाएँगे:

  • 1) सूर्योदय या सूर्यास्त के वक़्त योग का सही समय है।

  • 2) योग खाली पेट करें। योग करने से 2 घंटे पहले कुछ ना खायें।

  • 3) आरामदायक कपड़े पहनें।
4) शांत वातावरण और सॉफ जगह में योग अभ्यास करें।
  • 5) योग अभ्यास धैर्य और दृढ़ता से करें।
6) अपने शरीर के साथ ज़बरदस्ती बिल्कुल ना करें।
  • 7) योग करने के 30 मिनिट बाद तक कुछ ना खायें। 1 घंटे तक न नहायें।
8) प्राणायाम हमेशा आसन अभ्यास करने के बाद करें।
  • 9) योगाभ्यास के अंत में हमेशा शवासन करें।

योग के प्रकार:- 

योग के 4 प्रमुख प्रकार हैं:- 

1) राज योग: 
  • राज का अर्थ शाही है और योग की इस शाखा का सबसे अधिक महत्वपूर्ण अंग है ध्यान। इस योग के आठ अंग है, जिस कारण से पतंजलि ने इसका नाम रखा था अष्टांग योग। इसे योग सूत्र में पतंजलि ने उल्लिखित किया है। यह 8 अंग इस प्रकार है: 
  • 1) यम (शपथ लेना), 
  • 2) नियम (आचरण का नियम या आत्म-अनुशासन),
  • 3) आसन,
  • 4) प्राणायाम (श्वास नियंत्रण),
  • 5) प्रत्याहार (इंद्रियों का नियंत्रण),
  • 6) धारण (एकाग्रता),
  • 7) ध्यान (मेडिटेशन),
  • 8)  समाधि (परमानंद या अंतिम मुक्ति)
  •   राज योग आत्मविवेक और ध्यान करने के लिए तैयार व्यक्तियों को आकर्षित करता है। आसन राज योग का सबसे प्रसिद्ध अंग है, यहाँ तक कि अधिकतर लोगों के लिए योग का अर्थ ही है आसन। 

  • कर्म योग: 
     कर्म योग का सिद्धांत यह है कि जो आज हम अनुभव करते हैं वह हमारे कार्यों द्वारा अतीत में बनाया गया है। इस बारे में जागरूक होने से हम वर्तमान को अच्छा भविष्य बनाने का एक रास्ता बना सकते हैं,  जब भी हम अपना काम करते हैं और अपना जीवन निस्वार्थ रूप में जीते हैं और दूसरों की सेवा करते हैं, हम कर्म योग करते हैं। 
     
  • भक्ति योग:
    भक्ति योग भक्ति के मार्ग का वर्णन करता है। सभी के लिए सृष्टि में परमात्मा को देखकर, भक्ति योग भावनाओं को नियंत्रित करने का एक सकारात्मक तरीका है। भक्ति का मार्ग हमें सभी के लिए स्वीकार्यता और सहिष्णुता पैदा करने का अवसर प्रदान करता है। 
     
  • ज्ञान योग:
    अगर हम भक्ति को मन का योग मानते हैं, तो ज्ञान योग बुद्धि का योग है, ऋषि या विद्वान का मार्ग है। इस पथ पर चलने के लिए योग के ग्रंथों और ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से बुद्धि के विकास की आवश्यकता होती है। ज्ञान योग को सबसे कठिन माना जाता है और साथ ही साथ सबसे प्रत्यक्ष। इसमें गंभीर अध्ययन करना होता है और उन लोगों को आकर्षित करता है जो बौद्धिक रूप से इच्छुक हैं।

From www.myupchar.com

Tuesday, 4 June 2019

सांस लेने का सही तरीका


अगर आप सही सांस लेते हैं तो आपका "प्राणमय कोष" स्वस्थ, अखंड और प्राणवान रहता है।


इस तरह का व्यक्ति कभी नहीं थकता। इस तरह का व्यक्ति हमेशा कुछ भी करने के लिए उपलब्ध है। इस तरह का व्यक्ति हमेशा उत्तरदायी, हमेशा क्षण को प्रतिसंवेदित करने के लिए, चुनौती लेने के लिए तैयार है। वह हमेशा तैयार है, आप उसे किसी भी पल के लिए अप्रस्तुत नहीं पाएंगे। ऐसा नहीं है कि वह भविष्य के लिए योजना बनाता है, लेकिन उसके पास इतनी ऊर्जा है कि जो भी होता है उसका प्रतिसंवेदन करने के लिए वह तैयार है। उसके पास "छलकती हुई ऊर्जा" है।


प्राकृतिक सांस लेने को समझना जरूरी है। देखो छोटे बच्चों को, वे स्वाभाविक रूप से सांस लेते हैं। यही कारण है कि छोटे बच्चे ऊर्जा से भरे हुए होते हैं। माता-पिता थक गए हैं, लेकिन वे थके नहीं हैं।


कहां से ऊर्जा आती है? यह प्राणमय कोष से आती है। बच्चा स्वाभाविक रूप से सांस लेता है, और निश्चित रूप से अधिक प्राण और अधिक "ची- ऊर्जा" सांस के द्वारा लेता है, और यह उसके पेट में जमा होती है। पेट इकट्ठा करने की जगह है, भंडार है। बच्चे को देखो, वह सांस लेने का सही तरीका है। जब एक बच्चा सांस लेता है, उसकी छाती पूरी तरह से अप्रभावित होती है। उसका पेट ऊपर और नीचे होता है। मानो वह पेट से सांस ले रहा है। सभी बच्चों का पेट निकला होता है, वह उनके पेट से सांस लेने की वजह से है और वह ऊर्जा का भंडार है।


यह सांस लेने का सही तरीका है, ध्यान रहे, अपनी छाती का बहुत ज्यादा उपयोग नहीं करना है। कभी-कभी यह आपातकालीन समय में किया जा सकता है। आप अपने जीवन को बचाने के लिए दौड़ रहे हैं, तब छाती का उपयोग किया जा सकता है। यह एक आपातकालीन उपाय है। तो आप उथले, तेजी से सांस लेने का उपयोग कर सकते हैं और दौड़ सकते हैं। लेकिन आमतौर पर छाती का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। और एक बात याद रखनी जरूरी है कि छाती आपात स्थितियों के लिए ही होती है क्योंकि आपात स्थिति में स्वाभाविक रूप से सांस लेना मुश्किल है; क्योंकि अगर आप स्वाभाविक रूप से सांस लेते हैं तो आप इतने शांत और मौन होते हो कि आप दौड़ नहीं सकते, आप लड़ नहीं सकते। आप इतने शांत और केंद्रित होते हैं--एकदम बुद्ध जैसे। और एक आपात स्थिति में--जैसे घर में आग लगी है--यदि आप स्वाभाविक रूप से सांस लेंगे तो आप कुछ भी बचा नहीं पाएंगे। या जंगल में एक बाघ आप पर कूदता है और आप स्वाभाविक रूप से सांस लेते रहें तो आप फिक्र ही नहीं करेंगे। आप कहेंगे, 'ठीक है, उसे करने दो जो भी वह चाहता है।' आप अपने खुद को बचाने के लिए सक्षम नहीं होंगे।

तो प्रकृति ने एक आपातकालीन उपकरण दिया है, छाती एक आपातकालीन उपाय है। जब आप पर एक बाघ हमला करता है, तो आपको प्राकृतिक सांस छोड़ देनी होती है और आप को छाती से सांस लेनी होती है। तब दौड़ने के लिए , लड़ने के लिए, ऊर्जा को तेजी से जलाने के लिए आपके पास अधिक क्षमता होगी। और आपात स्थिति में केवल दो ही विकल्प होते हैं: भाग जाना या लड़ाई करना। दोनों के लिए बहुत उथली लेकिन तीव्र ऊर्जा की जरूरत है, उथली लेकिन एक बहुत परेशान, तनावग्रस्त स्थिति।


अगर आप लगातार सीने से सांस लेते हैं तो, आपके मन में तनाव होगा। अगर आप लगातार सीने से सांस लेते हैं, आप हमेशा भयभीत होंगे क्योंकि सीने से सांस लेना खतरनाक परिस्थितियों के लिए ही होता है। और यदि आपने इसे एक आदत बनाया है तो आप लगातार भयभीत, तनावग्रस्त, हमेशा भागने की तैयारी में होंगे। वहां दुश्मन नहीं है, लेकिन आप दुश्मनों की कल्पना करेंगे। इसी तरह " पैरानोया, व्यामोह" निर्मित होता है।


'एक बच्चे को देखें और वही प्राकृतिक सांस है, और उसी तरह सांस लें । जब आप सांस लें तब पेट ऊपर आए और जब आप सांस छोड़े तब पेट नीचे जाए। और यह एक ऐसी लय हो कि यह आपकी ऊर्जा में लगभग एक गीत बन जाता है, एक नृत्य ताल के साथ, सामंजस्य के साथ--और आप इतने निश्चिंत महसूस करेंगे, इतने जीवंत, जीवन-शक्ति से ओतप्रोत कि आप कल्पना नहीं  कर सकते कि ऐसी जीवन-शक्ति हो सकती है।'


 योगा: दि पाथ ऑफ लिबरेशन

Saturday, 1 June 2019

याद कर लो

चले थे साथ मिलकर हम कभी 
तुम वो जमाना याद कर लो 
बिछड़ गए हैं हम अभी 
पर तुम वो जमाना याद कर लो 
हाथो में लेकर हाथ 
बातें करते थे सारी रात 
न जाने कहाँ चली गयी वो शाम 
एक बार फिर वो शाम याद कर लो 
फिर आ जाओ मेरे पास 
रंगीन कर दो मेरी सुबह और शाम 
अपनी बाहों में भर के मुझे 
मेरे शरीर में जीवन का संचार कर दो 
चली गयी हो जब से बेजान हो गया हूँ 
तेरी राह तकते -तकते चट्टान हो गया हूँ 
आकर पास मेरे मुझे अपना बना लो 
विक्रान्त टूट जाये इससे पहले इसे अपना बना लो।

Friday, 31 May 2019

आगे ही अब बढ़ते जाओ

चल पड़े हो अगर बाबा तो, 
आगे ही अब बढ़ते जाओ, 
सोई हुई इस जनता को, 
अब फिर से जीना सिखलाओ, 
बहुत हो चुकी बर्बादी, 
इंसान जला सामान जला, 
श्मसान हो चुके गाँव- नगर को, 
फिर से नगर बना दो बाबा, 
अत्याचारी को सदाचार का, 
अब पाठ पढ़ा दो बाबा, 
अन्तरमन में दबी चिंगारी को, 
अब आग बनाओ जल्दी से, 
अत्याचार का अन्त करके, 
इंसान को इंसान बनाओ जल्दी से, 
धर्म का ऐसा हुँकार करो, 
जो जन- जन को दिखाई और सुनाई दे, 
जन - जन के भीतर का पाप मरे, 
बस इंसान ही इंसान दिखाई दे, 
अब इंसान को इंसान बना दो बाबा, 
जीना सबको सिखा दो बाबा।।

दिल चुराती हो मेरा/ Dil Churati Ho Mera

आती हो जब तुम सामने 
तो दिल मचल जाता है मेरा 
देखती हो जब पलकें उठाके 
तो दिल ठहर जाता है मेरा 
देखकर हो जब मुस्कुराती 
तो दिल बहक जाता है मेरा 
देखती हो जब तिरछी नजर से 
दिल घायल हो जाता है मेरा 
शरमा के हो जब नजरें झुकाती 
तो दिल चुराती हो मेरा।

Saturday, 18 May 2019

चलो दूरी मिटायें हम/ Chalo Duri Mitaye Hum

जब से तुमसे मिला हूँ मैं,
तेरी यादों में खोया हूँ,
उस दिन के सारे लम्हों को,
अपने दिल में बसाया हूँ,
सोचता हूँ तुमसे मिलकर,
बतलाऊँ अपनी हालात मैं,
या आंखों से सारी बात करूँ,
मुँह से कुछ भी न बोलू मैं,
हर लम्हा तुमसे मिलने की,
आस में मेरा बीत रहा,
क्या बोलूंगा तुमसे मिलकर,
हर पल विक्रान्त ये सोच रहा,
छोड़ो मेरी इस हालत को,
अपनी कहो तुम कैसी हो,
 नींद समय पर आती है,
या तड़प रही मेरे जैसी हो,
अगर हालत मेरे जैसे है,
तो चलो दूरी मिटाये हम,
मिलें जो अगली बार कभी,
तो एक दूजे में खो जायें हम।




Jab se tumse mila hun mai, 
Teri yaadon me khoya hun, 
Us din ke sare lamho ko, 
Apne dil me basaya hun, 
Sochta hun tumse milkar, 
Batlau apni halat mai, 
Ya aankho se sari baat karu, 
Muh se kuchh bhi na bolu mai,
Har lamha tumse milne ki, 
Aas me mera beet raha, 
Kya bolunga tumse milkar,
Har pal VIKRANT ye soch raha,
Chhodo meri is halat ko, 
Apni kaho tum kaisi ho, 
Need samay par aati hai, 
Ya tadap rahi meri jaisi ho, 
Agar halat mere jaise hain, 
To chalo duri mitaye hum,
Mile jo agli baar kabhi, 
Ek duje me kho jaye hum.