Tuesday, 7 August 2018

श्री शिव चालीसा/ Shri Shiva Chalisa


दोहा


श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान




चौपाई 


जय गिरिजा पति दीन दयाला सदा करत सन्तन प्रतिपाला
भाल चन्द्रमा सोहत नीके कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये मुण्डमाल तन छार लगाये
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे छवि को देख नाग मुनि मोहे

मैना मातु की ह्वै दुलारी बाम अंग सोहत छवि न्यारी
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी करत सदा शत्रुन क्षयकारी

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ या छवि को कहि जात काऊ

देवन जबहीं जाय पुकारा तब ही दुख प्रभु आप निवारा
किया उपद्रव तारक भारी देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी

तुरत षडानन आप पठायउ लवनिमेष महँ मारि गिरायउ
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई सबहिं कृपा कर लीन बचाई
किया तपहिं भागीरथ भारी पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं सेवक स्तुति करत सदाहीं
वेद नाम महिमा तव गाई अकथ अनादि भेद नहिं पाई

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला जरे सुरासुर भये विहाला
कीन्ह दया तहँ करी सहाई नीलकण्ठ तब नाम कहाई

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा जीत के लंक विभीषण दीन्हा
सहस कमल में हो रहे धारी कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी

एक कमल प्रभु राखेउ जोई कमल नयन पूजन चहं सोई
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर भये प्रसन्न दिए इच्छित वर

जय जय जय अनंत अविनाशी करत कृपा सब के घटवासी
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै भ्रमत रहे मोहि चैन आवै

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो यहि अवसर मोहि आन उबारो
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो संकट से मोहि आन उबारो

मातु पिता भ्राता सब कोई संकट में पूछत नहिं कोई
स्वामी एक है आस तुम्हारी आय हरहु अब संकट भारी

धन निर्धन को देत सदाहीं जो कोई जांचे वो फल पाहीं
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी क्षमहु नाथ अब चूक हमारी

शंकर हो संकट के नाशन मंगल कारण विघ्न विनाशन
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं नारद शारद शीश नवावैं

नमो नमो जय नमो शिवाय सुर ब्रह्मादिक पार पाय
जो यह पाठ करे मन लाई ता पार होत है शम्भु सहाई

ॠनिया जो कोई हो अधिकारी पाठ करे सो पावन हारी
पुत्र हीन कर इच्छा कोई निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई

पण्डित त्रयोदशी को लावे ध्यान पूर्वक होम करावे
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा तन नहीं ताके रहे कलेशा

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे शंकर सम्मुख पाठ सुनावे
जन्म जन्म के पाप नसावे अन्तवास शिवपुर में पावे

कहे अयोध्या आस तुम्हारी जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥



दोहा


नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण



Sunday, 5 August 2018

कबीरदास के अनमोल वचन/ Kabirdas ke anmol vachan

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब.

पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब.

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि जो कल करना है उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो, कुछ ही समय में जब जीवन ख़त्म हो जायेगा फिर तुम कुछ नहीं कर पाओगे.



लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट.

पाछे फिर पछ्ताओगे, प्राण जाहि जब छूट.

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि अभी राम नाम की लूट मची है, अभी तुम भगवान का जितना नाम लेना चाहो ले लो नहीं तो फिर समय निकल जाने पर अर्थात मर जाने के बाद पछताओगे कि मैंने तब भगवान राम की पूजा क्यों नहीं की.


माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख.

माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख.

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि कुछ भी माँगना मरने के बराबर है इसलिए किसी से भी भीख मत मांगो. सतगुरु जी कहते हैं कि मांगने से मर जाना बेहतर है अर्थात अपने पुरुषार्थ से स्वयं चीजों को प्राप्त करो, उसे किसी से मांगो मत.

Saturday, 4 August 2018

शीतली प्राणायाम/ Sheetli Pranayam

शीतली प्राणायाम क्या है :-

शीतली प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है शीतली + प्राणायाम = शीतली प्राणायाम, इस प्राणायाम को करने से शरीर को ठंडक मिलती है । इसलिए इसे शीतली प्राणायाम कहा जाता है। यह प्राणायाम एक छायादार वृक्ष की तरह है जो भरपूर ऑक्सीजन का निर्माण करता है। ये गर्मियों के मौसम में किया जाने वाला सबसे अच्छा प्राणायाम है।

विधि :-

  सबसे पहले समतल जमीन पर कोई दरी बिछा कर उस पर सिद्धासन , सुखासन की अवस्था में बैठ जाएँ । अब अपनी जीभ को बहार निकालकर उसे मोड़ लें अथार्त उसे मोड़ कर पाइप जैसा बना लें । अब इस जीभ के माध्यम से लम्बी व् गहरी स्वांस खींचकर अपने पेट में वायु को भर दें । अब अपनी बहार निकली हुई जीभ को अन्दर कर लें और अपने मुहं को बंद कर लें । अब अपनी गर्दन को आगे की ओर झुकाकर अपने जबड़े के अगले हिस्से को छाती से लगा लें । अब अपने स्वांस को नासिका के जरिये स्वांस को बाहर निकाल दें  ध्यान रखें कि आपको सांस एक साथ बहार नहीं निकालना है बल्कि धीरे -धीरे बहार निकालना है ।


लाभ :-

1-गर्मी में फायदेमंद :- हमारे शरीर से गर्म वायु को निकाल कर उसमें शीतल वायु का प्रवेश कराता है जिससे हमारे शरीर से गर्मी बहार निकल जाती है और पूरा शरीर ठंडा हो जाता है |

2- ब्लड प्रेशर को कम करे :- अगर आपका B.P या blood pressure (रक्तचाप ) बढ़ा हुआ है तो आप शीतली प्राणायाम का अभ्यास करके हाई ब्लड प्रेशर(उच्च रक्तचाप) को कम कर सकते हैं | अगर आपका B.P लो है तो आप इस प्राणायाम का अभ्यास न करें क्यूंकि ये बढे हुए B.P को कम करता है |

3 - चेहरे पर चमक बने :- इस प्राणायाम के अभ्यास से हम अपने चेहरे पर प्राक्रतिक चमक ला सकते हैं |क्योंकि यह ब्लड को सुद्ध करता है अगर हमारा ब्लड साफ़ हो जाता है तो अपने आप ही चेहरे पर चमक बढ़ जाती है।

4-आंखों की समस्याओं से निजात :- अगर कोई भी व्यक्ति इस प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास करता है तो वो अपनी आँखों की समस्या से जल्द ही छुटकारा पा सकता है | अगर उसके चश्मे भी चढ़े हुए हैं तो वो भी उतर सकते हैं इसके लिए आप कुछ देशी औषधि का सेवन भी कर सकते हैं ।


सावधानी :-

ये प्राणायाम सुबह -सुबह खाली पेट करना चाहिए । इसका अभ्यास सर्दियों के मौसम में नहीं करना चाहिए । दमा, कफ , खांसी की शिकायत वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए । लो ब्लडप्रेशर से ग्रसित लोगों को ये प्राणायाम नहीं करना चाहिए। इसका अभ्यास पूरा होने के बाद कुछ देर विश्राम करें। शीतली प्राणायाम के समय साँस लयबद्ध और गहरी होनी चाहिए।